साय सरकार के 2 साल बाद भी मोदी की गारंटी’ नहीं हुई पूरी : विनोद चंद्राकर

0
16

संविदा, दैवेभो कर्मचारियों को 100 दिन के भीतर नियमित करने का था वादा

महासमुंद। पूर्व संसदीय सचिव छ.ग. शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बने 2 वर्ष होने को है, इन दाे वर्षों में सरकार ने ऐसा कोई कार्य नहीं किया जिससे प्रदेश वासियों के जीवन में बदलाव आए। राज्य सरकार आज हर मोर्चे पर विफल हो चुकी है। कानून-व्यवस्था, गरीब, किसान, दलित और आदिवासी आज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, और इसके लिए सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है।

श्री चंद्राकर ने कहा कि भाजपा ने घोषणा पत्र में सरकार बनने के तुरंत बाद 57 हजार रिक्त पदों पर तथा 2 साल के भीतर 1 लाख खाली पदों पर भर्ती करने का संकल्प मोदी की गारंटी के तहत लिया था। इसके अलावा दैवेभो कर्मचारी, संविदा कर्मियों को नियमितिकरण के लिए सरकार बनने के 100 दिन के भीतर ही समीक्षात्मक प्रक्रिया आरंभ करने एवं कमेटी बनाने की बात कही थी। इस वादे पर क्रियान्वयन का आज 2 साल बाद भी अता-पता नहीं है। माह अगस्त 2025 से प्रदेश के 16 हजार से अधिक एनएचएम कर्मचारियों ने नियमितीकरण व वेतन वृद्धि जैसे मांगों को लेकर लगभग डेढ़ माह तक आंदोलन किया। सरकार ने आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त कराया था, जिसमें शासन द्वारा कहा गया था कि 5 प्रतिशत वेतन वृद्धि के साथ हड़ताल अवधि का वेतन भी दीपावली पूर्व उन्हें प्रदान किया जाएगा। लेकिन, दीपोत्सव जैसे सबसे बड़े त्याैहार में उन्हें वेतन नहीं दिया गया। दीपावली जैसे बड़े त्यौहार पर जहाँ पूरा प्रदेश खुशियां मना रही थीं, वहीं सरकार के धोखेबाजी के कारण राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के हजारों कर्मचारी इस बार मायूसी और आर्थिक तंगी के बीच त्योहार मनाने को विवश हुए। हड़ताल अवधि में बर्खास्त किए गए 25 एनएचएम कर्मचारियों की बहाली भी नहीं की गई।

* शीघ्र पूर्ण करें सहकारी समिति कर्मचारियों की सभी मांगे

श्री चंद्राकर ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार के गलत नीतियों के कारण धान खरीदी में संलग्न सहकारी समिति के कर्मचारियों में भी सरकार के खिलाफ आक्रोश हैं। 24 अक्टूबर से वे भी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू करने की बातें कह रहे हैं। आगामी नवंबर माह से धान खरीदी शुरू हो जाएगी। ऐसे में सहकारी समितियों के कर्मचारियों, कम्प्यूटर आॅपरेटरों द्वारा काम बंद करने से धान खरीदी प्रभावित होगी। ये कर्मचारी अपनी जायज मांगों को लेकर शासन से मांग कर रहे हैं। पूर्ववर्ती भूपेश सरकार के समय 72 घंटे के भीतर खरीदी केंद्रों से धान का उठाव के नियम बनाए गए थे। जिससे समितियों को सूखत की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता था। लेकिन, वर्तमान सरकार धान खरीदी को लेकर संवेदनशील नहीं है। धान खरीदी के लिए कोई ठोस नीति इनके पास नहीं है। गत वर्ष इसी ढूल-मूल रवैये के कारण धान खरीदी में भारी अव्यवस्था देखने को मिला था। शासन शीघ्र ही सहकारी समिति कर्मचारियों के समस्त मांगों को पूर्ण कर धान खरीदी व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित करने का प्रयास करें। ताकि, कर्मचारियों के साथ ही किसानों को भी किसी प्रकार की समस्या ना होने पाए।