भूमिहीन परिवारों को योजना के लाभ से वंचित कर भाजपा ने दिया गरीब विरोधी होने का प्रमाण
महासमुंद। पूर्व संसदीय सचिव छग शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने भाजपा की साय सरकार द्वारा भूमिहीन कृषि मजदूर योजना में किए जा रहे छटनी कार्रवाई को गरीब भूमिहीनों के साथ अन्याय व उनके हक पर कुठाराघात बताया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की भूपेश सरकार ने प्रदेश के गरीब, भूमिहीन परिवारों को सम्मानजनक जीवन देने के उद्देश्य से इस योजना की शुरुआत की थी। उस समय 10 लाख से अधिक परिवारों को हर साल सीधी आर्थिक सहायता मिल रही थी। यह योजना केवल सहायता नहीं थी, बल्कि ग्रामीण गरीबों के लिए आत्मसम्मान और आर्थिक संबल का प्रतीक बन चुकी थी। जिसे, सत्ता में आते ही भाजपा की साय सरकार ने सबसे पहले इस योजना का नाम बदलकर अपनी पीठ थपथपाने का काम किया। नाम बदलने के साथ ही सरकार ने सत्यापन और तकनीकी नियमों का हवाला देकर प्रदेश भर में लाखों पात्र परिवारों को अपात्र घोषित कर दिया। अकेले महासमुंद जिले में लगभग 3000 ऐसे भूमिहीन परिवार हैं जो पहले से पात्र थे, जिनकी रोजी-रोटी पूरी तरह मजदूरी पर निर्भर है, लेकिन आज उन्हें इस योजना के लाभ से पूरी तरह वंचित कर दिया गया है। पूरे प्रदेश में 5 लाख से अधिक गरीब परिवारों को इसी तरह बाहर कर दिया गया है।श्री चंद्राकर ने कहा कि आज स्थिति यह है कि साय सरकार आधे से भी कम हितग्राहियों को समय पर और सही तरीके से लाभ नहीं दे पा रही है। जिन लोगों को 10 हजार रु की राशि मिलनी थी, उनके खाते खाली पड़े हैं। सरकार के पास बड़े उद्योगपतियों को लाखों करोड़ का अनुदान देने के लिए खजाना भरा हुआ है, लेकिन गरीब मजदूर को साल भर में मिलने वाली मामूली सहायता देने में सरकार की नीयत और नीति दोनों फेल हो गई हैं। यह सीधे-सीधे गरीब विरोधी सोच का प्रमाण है।पूर्व विधायक ने कहा कि भाजपा सरकार यह भूल रही है कि छत्तीसगढ़ की मिट्टी मेहनतकशों की मिट्टी है। भूमिहीन परिवारों की गाढ़ी कमाई से ही प्रदेश का पेट भरता है। ऐसे में उनके हक को छीनकर सरकार न केवल अन्याय कर रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को भी तोड़ रही है। महासमुंद जिले के हजारों परिवार आज इस कारण निराश हैं क्योंकि उनके पास न जमीन है और न ही सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता। उन्होंने मांग की है कि सरकार तत्काल सभी अपात्र घोषित किए गए पात्र परिवारों की सूची का पुनः सत्यापन करे, कटे हुए सभी नामों को पुनः जोड़े और बकाया राशि एकमुश्त खातों में डाले। साथ ही योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाकर पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों को विश्वास में लिया जाए। उन्होंने अंत में कहा कि गरीबों के निवाले पर डाका डालने वाली इस सरकार को छत्तीसगढ़ की जनता कभी माफ नहीं करेगी।








