महासमुंद। महासमुंद जिले के सांकरा थाना क्षेत्र में पुलिस विभाग के एक आरक्षक द्वारा रिश्वत लेने का वीडियो वायरल होने के बाद, विभाग द्वारा दोषी पर कड़ी कार्रवाई करने के बजाय महज लाइन अटैच किए जाने पर महासमुंद के पूर्व विधायक डॉ. विमल चोपड़ा ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। डॉ. चोपड़ा ने इस पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जब किसी अन्य सरकारी विभाग का कोई कर्मचारी रिश्वत लेते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे तुरंत जेल भेजा जाता है और उस पर एफआईआर दर्ज की जाती है। परंतु विडंबना यह है कि पुलिस विभाग, जिसके हाथ में कानून की कलम और कागज दोनों हैं, वह अपने ही दागी कर्मचारियों को बचाने और उन्हें संरक्षण देने में लगा हुआ है।
पूर्व विधायक डॉ. विमल चोपड़ा ने साफ तौर पर कहा कि सोशल मीडिया पर वीडियो का वायरल होना अपने आप में भ्रष्टाचार का एक पुख्ता और प्रत्यक्ष सबूत है। ऐसी स्पष्ट स्थिति में दोषी आरक्षक पर बिना किसी देरी के तुरंत एफआईआर दर्ज कर उसे जेल भेजा जाना चाहिए था। उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली पर क्षोभ जताते हुए कहा कि लगातार यह देखने में आ रहा है कि पुलिस महकमा विभागीय जांच के नाम पर केवल औपचारिकता और खानापूर्ति करता है। कुछ समय बीत जाने के बाद किसी दोषी कर्मचारी की एक-आध वेतन वृद्धि रोककर उन्हें पुनः बहाल कर दिया जाता है, जिसके कारण जनता को प्रताड़ित करने वाले और भ्रष्टाचार में लिप्त लोग समाज में मजे से घूमते रहते हैं।
डॉक्टर चोपड़ा ने कड़े शब्दों में मांग की है कि रिश्वतखोरी के ऐसे मामलों में तत्काल प्रभाव से निलंबन और एफआईआर की सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, जिसके बाद न्यायालय द्वारा दिए गए कानूनी फैसले के आधार पर ही आगे का अंतिम निर्णय लिया जाए। पुलिस विभाग द्वारा गंभीर अपराधों में संलिप्त अपने ही कर्मचारियों को बचाने की इस गलत और अनुचित परंपरा के खिलाफ पूर्व विधायक डॉ. विमल चोपड़ा द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से लिखित शिकायत कर इस पूरे मामले में उच्च स्तरीय हस्तक्षेप और सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी।








