E20 पेट्रोल आम जनता पर थोपना बंद करे केंद्र सरकार, शुद्ध पेट्रोल का विकल्प दे — डॉ. रश्मि चंद्राकर

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महासमुंद। जिला कांग्रेस कमेटी की पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. रश्मि चंद्राकर ने देशभर में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण (E20) को अनिवार्य रूप से लागू किए जाने पर केंद्र सरकार की नीति पर गंभीर आपत्ति जताई है। 

डॉ. रश्मि चंद्राकर ने कहा कि E20 नीति करोड़ों वाहन मालिकों पर बिना पर्याप्त तैयारी और विकल्प दिए लागू की जा रही है, जिससे आम नागरिक आर्थिक और तकनीकी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश मध्यमवर्गीय परिवार वर्षों की मेहनत, बैंक ऋण या किस्तों पर दोपहिया और चारपहिया वाहन खरीदते हैं। ऐसे में यदि सरकारी नीति के कारण वाहनों की कार्यक्षमता प्रभावित हो, माइलेज घटे और मरम्मत का खर्च बढ़े, तो इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है।

डॉ रश्मि चंद्राकर ने आरोप लगाया कि देश में आज भी बड़ी संख्या में ऐसे वाहन चल रहे हैं जो E20 ईंधन के अनुरूप निर्मित नहीं हैं। ऐसे वाहनों में एथनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग से फ्यूल पंप, फ्यूल लाइन, इंजेक्टर, रबर सील, पाइप और इंजन के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

डॉ. रश्मि चंद्राकर ने कहा कि एथनॉल नमी को आकर्षित करने वाला ईंधन है, जिससे ईंधन प्रणाली में जंग लगने, इंजन के पुर्जों के जल्दी घिसने तथा वाहन की कार्यक्षमता प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है। यदि सरकार इस नीति को लागू करना चाहती थी, तो पहले पुराने वाहनों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश, सुरक्षा उपाय और पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए था।

डॉ रश्मि चंद्राकर ने कहा कि एथनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल से कम होने के कारण अनेक वाहन चालकों को माइलेज में कमी का अनुभव हो रहा है। परिणामस्वरूप ईंधन की खपत बढ़ रही है और महंगाई के दौर में गरीब, मध्यमवर्गीय परिवारों, किसानों, मजदूरों, विद्यार्थियों, छोटे व्यापारियों तथा रोज़ वाहन चलाकर आजीविका कमाने वालों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

डॉ. रश्मि चंद्राकर ने यह भी कहा कि वर्तमान में अधिकांश पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं के पास शुद्ध पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध नहीं है। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपने वाहन की तकनीकी आवश्यकता के अनुसार ईंधन चुनने का अधिकार होना चाहिए। सरकार का दायित्व विकल्प उपलब्ध कराना है, किसी एक व्यवस्था को अनिवार्य रूप से थोपना नहीं।

डॉ रश्मि चंद्राकर ने यह भी कहा कि विभिन्न स्थानों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि एथनॉल मिश्रित ईंधन के कारण इंजन में खराबी आने पर वाहन मालिकों को वारंटी और बीमा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सरकार को इस विषय में स्पष्ट नीति बनाकर उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।

डॉ. रश्मि चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा जनता की समस्याओं को प्रमुखता से उठाती रही है। करोड़ों वाहन उपभोक्ताओं की बढ़ती चिंताओं को देखते हुए केंद्र सरकार को इस नीति की व्यापक समीक्षा करनी चाहिए और जनता की बात गंभीरता से सुननी चाहिए।

डॉ रश्मि चंद्राकर ने केंद्र की मोदी सरकार से मांग की कि E20 मिश्रण की अनिवार्यता तत्काल समाप्त की जाए, सभी पेट्रोल पंपों पर सामान्य (शुद्ध) पेट्रोल उपलब्ध कराया जाए ताकि उपभोक्ता अपनी आवश्यकता के अनुसार ईंधन का चयन कर सकें। साथ ही एथनॉल मिश्रित ईंधन के कारण जिन वाहन स्वामियों को तकनीकी या आर्थिक नुकसान हुआ है, उनके लिए पारदर्शी मुआवजा व्यवस्था लागू की जाए।

डॉ रश्मि चंद्राकर ने कहा कि यदि समय रहते इस विषय पर गंभीरता से निर्णय नहीं लिया गया, तो यह आने वाले समय में करोड़ों वाहन उपभोक्ताओं की बड़ी जनसमस्या बन सकता है। ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सरकार को आम नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकारों की भी समान रूप से रक्षा करनी चाहिए।