जबरदस्ती ई 20 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल थोपना जनता के अधिकारों का हनन : विनोद चंद्राकर

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महासमुंद। पूर्व संसदीय सचिव छग शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के उस बयान को जनता को गुमराह करने वाला बताया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से आज तक किसी गाड़ी में कोई शिकायत नहीं मिली है। 

श्री चंद्राकर ने कहा कि केन्द्र की भाजपा सरकार ने देश की जनता से बिना पूछे, बिना कोई विकल्प दिए पूरे देश में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित ई 20 पेट्रोल लागू कर दिया है। यह निर्णय किसी वैज्ञानिक आधार या उपभोक्ता की सहमति से नहीं लिया गया, बल्कि एकतरफा आदेश के रूप में जनता पर थोपा गया है। आज दुनिया के तमाम प्रगतिशील देशों में उपभोक्ताओं को चुनने की आजादी दी जाती है। अमेरिका, ब्राजील, कनाडा और यूरोप के कई देशों में ई 10, ई 20 के साथ-साथ बिना इथेनॉल वाला शुद्ध पेट्रोल भी पंपों पर उपलब्ध है। वहां सरकारें उपभोक्ता को तय करने देती हैं कि वह अपनी गाड़ी, अपनी जेब और अपनी सुविधा के अनुसार कौन सा ईंधन लेना चाहता है। लेकिन भारत में मोदी सरकार ने यह बुनियादी विकल्प ही खत्म कर दिया। न शुद्ध पेट्रोल बचा, न कोई दूसरा विकल्प। यह सीधे-सीधे जनता के अधिकारों का हनन है।

पूर्व संसदीय सचिव ने कहा कि सरकार दावा कर रही है कि ई 20 से कोई समस्या नहीं है। लेकिन देश के कोने-कोने से वाहन मालिकों की शिकायतें आ रही हैं। पुरानी गाड़ियों में इंजन में झटके लगना, माइलेज का गिरना, फ्यूल पाइप और रबर के हिस्सों का जल्दी खराब होना आम बात हो गई है। सर्विस सेंटर पर लंबी लाइनें लग रही हैं। आम आदमी अपनी मेहनत की कमाई से खरीदी गाड़ी की मरम्मत के लिए बार-बार पैसा खर्च करने को मजबूर हो रहे हैं। सरकार आंकड़ों और भाषणों से इसे नकार सकती है, लेकिन सड़क पर चल रही जनता की परेशानी को नकारा नहीं जा सकता।

इससे भी बड़ा सवाल कीमतों का है। आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमत युद्ध से पहले वाले स्तर पर आ गई है। क्रूड 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बिक रहा है। जब दाम इतने नीचे आ गए हैं तो स्वाभाविक था कि भारत में पेट्रोल और डीजल सस्ता होता। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। सरकार इथेनॉल को महंगाई कम करने का तर्क देकर सामने लाई थी, पर आज जब क्रूड सस्ता है तब भी जनता को कोई राहत नहीं मिल रही। साफ है कि सरकार न तो दाम कम करना चाहती है और न ही जनता को राहत देना चाहती है।

श्री चंद्राकर ने मांग की है कि मोदी सरकार तुरंत इस मनमाने फैसले को वापस ले। हर पेट्रोल पंप पर ई 20 के साथ-साथ ई 10 और बिना इथेनॉल वाला पेट्रोल भी उपलब्ध कराया जाए। साथ ही ई 20 से होने वाले नुकसान की एक स्वतंत्र जांच कराई जाए और यदि किसी की गाड़ी को नुकसान हुआ है तो उसकी मरम्मत का खर्च सरकार और तेल कंपनियां वहन करें। श्री चंद्राकर ने सख्त लहजे में कहा है कि देश की जनता प्रयोगशाला नहीं है। उन पर जबरदस्ती कोई ईंधन थोपना लोकतंत्र और उपभोक्ता हित दोनों के खिलाफ है। सरकार भ्रम फैलाना बंद करे और जनता को उसका हक और विकल्प वापस दे।