भाजपा सरकार के 20 माह के कार्यकाल में किसानों की दुर्दशा : विनोद चंद्राकर

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शासकीय दुकानों में यूरिया संकट, खुले बाजार में अधिक दर पर असानी से मिल रहा

महासमुंद। छत्तीसगढ़ में भाजपा की डबल इंजन की सरकार किसानों के लिए पूरी तरह ट्रबल इंजन बन चुका है। सरकार को किसानों के परेशानियों से कोई सराेकार नहीं है। सरकार ने खरीफ सीजन शुरू होते ही पहले कृत्रिम रूप ऐ डीएपी संकट खड़ा किया आैर अब यूरिया संकट पैदा कर धान उत्पादन को घटाने की षड़यंत्र रचा है। उक्त आरोप पूर्व संसदीय सचिव छ.ग. शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने आज किसानों द्वारा यूरिया संकट को लेकर सांकरा के पास नेशनल हाइवे में चक्काजाम किए जाने पर कही।

श्री चंद्राकर ने कहा कि भाजपा की साय सरकार द्वारा रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण खाद संकट की स्थिति उत्पन्न होने की बात कही जा रही है। जिसके चलते सहकारी समितियों में डीएपी, यूरिया आदि खाद किसानों को उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। यदि ऐसा है तो खुले बाजार में बड़ी मात्रा में यूरिया का भंडारण कहां से किया जा रहा है। जिसे आैने-पाैने दाम पर किसानों को 3-4 गुना अधिक दर पर बेचा जा रहा है। जो यूरिया 266 रूपए की दर पर समितियों में मिलता है, आज वह बाजार में 1000 रूपए में बेचा जा रहा है। इस पर शासन-प्रशासन जानबूझकर अंकुश नहीं लगा रही है, जिससे सरकार के संरक्षण में कमीशन के लिए कालाबाजारी से इंकार नहीं किया जा सकता।

पूर्व संसदीय सचिव श्री चंद्राकर ने किसानों द्वारा किए गए चक्काजाम को भाजपा सरकार के लिए शर्मनाक बताते हुए कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस शासन में पूरे 5 वर्ष किसानों को सोसायटियों में यूरिया, डीएपी संकट का सामना नहीं करना पड़ा। आज भाजपा के महज 20 महीने के कार्यकाल में ही किसानों को खाद के लिए रूलाया जा रहा है। किसान इस कदर विवश हो रहे हैं कि उन्हें चक्काजाम करना पड़ रहा है। महंगाई के दाैर में किसानों ने किसी तरह बोनी, रोपाई तो कर ली। लेकिन, ऐन शुरूआत में ही किसानों को डीएपी के लिए परेशान किया गया। जैसे तैसे डीएपी के विकल्प के रूप में अन्य एनपीके आदि महंगे दाम पर खरीदकर किसानों ने काम चलाया। लेकिन, अब यूरिया जैसे महत्वपूर्ण उर्वरक के लिए उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार हर उपाय कर किसानों में हताशा व निराशा उत्पन्न करने की साजिश कर रही है। जिससे किसान अपनी जमीन बेचकर, खेती छोड़कर मजदूर बन जाए। यह सरकार पूरी तरह कार्पोरेट सरकार बन चुकी है। बड़े उद्योगपतियों के इशारे पर किसानों के हक की पानी कारखानों को देने, जमीनों, जंगलों को अडाणी जैसे लोगों को साैंपकर छत्तीसगढ़ के किसानों, आदिवासियों, छत्तीसगढि़यों को बंधवा मजदूर बनाने की दिशा में एक सोची-समझी रणनीति के तहत भाजपा की सरकार आगे बढ़ रही है।