•पीकेबी के चालू खदान से 15 पूर्व तक के ग्रेड की आपूर्ति हो सकती है
• अडानी को फायदा एक एयर खदान के लिए मिलेगा 6 लाख का पेड़
महासमुंद। पूर्व संसदीय सचिव छ.ग. शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने भाजपा की साय सरकार द्वारा हसदेव अरण्य के केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक में अडाणी को जंगल काटने की एक और अनुमति दिए जाने के निर्णय को प्रदेश वासियों के साथ धोखा तथा प्रदेश को जंगल विहीन बनाने की दिशा में भाजपा का तानाशाही कदम बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की साय सरकार ने हसदेव वन की 1,742.60 हेक्टेयर भूमि को एक और कोयला ब्लॉक के लिए हस्तांतरित कर दिया है। जिसमें से 1,742 हेक्टेयर (99%) घना जंगल है। इस वन भूमि के 6 लाख पेड़ों की कटाई अडाणी द्वारा किया जाएगा।
श्री चंद्राकर ने कहा कि सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान को सालाना जितने कोयले की जरूरत है, वह पीईकेबी की चालू खदान से अभी कम से कम 15 साल तक पूरी हो सकती है। इसके बाद भी कोयला उत्खनन के लिए 1760 हेक्टेयर वन भूमि को दिया जाना सीधे अडाणी को लाभ पहुंचाने हेतु किया जा रहा अनैतिक कार्य है। छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार प्रदेश वासियों के हित में नहीं केवल अडाणी के हित में कार्य कर रही है। प्रदेश में बारिश की निर्भरता हसदेव जंगल पर है। यदि इसे पूरी तरह नष्ट कर दिया गया तो छत्तीसगढ़ को भयावह परिणाम देखने को मिलेगा।
पूर्व संसदीय सचिव ने कहा कि राजस्थान विद्युत निगम जिसकी खदानों का एमडीओ अडानी कंपनी है, उसे पहले परसा कोल ब्लॉक में पर्यावरणीय और वन स्वीकृति दी गई थी। जिसकी प्रारंभिक अनुशंसा भाजपा की रमन सिंह सरकार ने की थी। हालांकि जुलाई, 2022 में विधानसभा में सर्वसम्मति से हसदेव में वनों की कटाई रोकने का प्रस्ताव पारित होने के बाद कांग्रेस सरकार ने परसा कोल ब्लॉक में जंगल की कटाई नहीं होने दी थी। पूर्ववर्ती भूपेश सरकार ने राजस्थान विद्युत निगम को स्पष्ट कह दिया था कि इसकी पूरी आवश्यकता पहली खदान पीईकेबी से पूरी हो रही है तो दूसरे या तीसरे ब्लॉक को खोलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यही नहीं कांग्रेस सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिख कर परसा कोल ब्लॉक रद्द करने की मांग भी की थी। लेकिन, छत्तीसगढ़ में सरकार बदलते ही भाजपा ने अडानी के फायदे के लिए छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक सुंदरता से आच्छादित जंगलों की कटाई और हसदेव बागों बांध के जलग्रहण क्षेत्र को अडाणी के लिए बलि चढ़ा रही है।
हाथी-मानव द्वंद्व बढ़ने का खतरा
श्री चंद्राकर ने कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” का नारा देने वाली भाजपा की साय सरकार अब “सारा जंगल उद्योगपति के नाम कर रही है। 6 लाखें पेड़ों की कटाई की अनुति देना न केवल भारतीय वन्यजीव संस्थान के हसदेव में खनन पर रोक लगाने के सुझाव के खिलाफ है। बल्कि छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा क्षेत्र में सभी कोयला ब्लॉकों को रद्द करने के लिए पारित सर्वसम्मत प्रस्ताव की भी अवहेलना है। यह क्षेत्र प्रस्तावित लेमरू हाथी रिजर्व से सिर्फ 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पेड़ों की कटाई से मानव-हाथी संघर्ष बढ़ने की गंभीर आशंका है। जो पहले से ही इस क्षेत्र में एक बड़ी समस्या है। भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा किए गए एक जैव विविधता अध्ययन ने पहले चेतावनी दी थी कि ‘हसदेव में खनन से हाथी- मानव संघर्ष काफी बढ़ जाएगा, जिससे राज्य के लिए इसे प्रबंधित करना मुश्किल हो जाएगा।








