महासमुंद नगर पालिका की लापरवाही से जनता त्रस्त, गोल बाजार का सार्वजनिक शौचालय बना बदहाली का प्रतीक, वर्षों से बंद स्ट्रीट लाइट से बढ़ा खतरा

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महासमुंद। शहर को स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के बड़े-बड़े दावे करने वाली नगर पालिका महासमुंद की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर के सबसे व्यस्त एवं प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र गोल बाजार, शिव मंदिर के समीप स्थित सार्वजनिक शौचालय और आसपास की मूलभूत व्यवस्थाओं की स्थिति नगर पालिका की गंभीर उदासीनता को उजागर करती है।

स्थानीय नागरिकों एवं व्यापारियों का कहना है कि सार्वजनिक शौचालय की वर्षों से समुचित सफाई नहीं की गई है। शौचालय के भीतर और आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है तथा लगातार फैल रही दुर्गंध के कारण दुकानदारों, ग्राहकों, महिलाओं, बुजुर्गों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्वच्छता के नाम पर हजारों, लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि शहर के मध्य स्थित सार्वजनिक शौचालय की यह स्थिति है, तो बाकी क्षेत्रों की हालत का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

स्थिति यहीं तक सीमित नहीं है। गोल बाजार चौक की स्ट्रीट लाइट भी लंबे समय से बंद पड़ी हुई है, जिससे प्रतिदिन शाम ढलते ही पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूब जाता है। यह केवल असुविधा का विषय नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला भी है। अंधेरे के कारण दुर्घटनाओं एवं असामाजिक गतिविधियों की आशंका बनी रहती है, लेकिन नगर पालिका प्रशासन इस ओर ध्यान देता दिखाई नहीं देता।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत और मौखिक आग्रह किए जाने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। इससे यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या नगर पालिका केवल कागजों में ही सफाई और विकास के दावे कर रही है? यदि शहर के प्रमुख बाजार की यह स्थिति है, तो आम मोहल्लों में व्यवस्थाओं का स्तर कैसा होगा?

जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वे केवल औपचारिक निरीक्षण और घोषणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि वास्तविक समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें। सार्वजनिक सुविधाओं की उपेक्षा सीधे-सीधे आम जनता के स्वास्थ्य, सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा विषय है।

नगर पालिका महासमुंद से जनहित में मांग की गई है

1. सार्वजनिक शौचालय की तत्काल विशेष सफाई एवं नियमित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए।

2. बंद पड़ी स्ट्रीट लाइट को प्राथमिकता के आधार पर चालू कराया जाए।

3. क्षेत्र में स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था एवं आवश्यक नागरिक सुविधाओं की नियमित निगरानी की जाए।

4. जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति रोकी जाए।

नगर वासियों का कहना है कि शहर के विकास का वास्तविक पैमाना बड़े-बड़े होर्डिंग या दावों से नहीं, बल्कि नागरिकों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं से तय होता है। अब समय आ गया है कि नगर पालिका महासमुंद जनभावनाओं का सम्मान करते हुए केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस कार्रवाई कर यह साबित करे कि जनहित वास्तव में उसकी प्राथमिकता है।