डोंगरगढ़ में भाजपा के 111 कार्यकर्ताओं के इस्तीफे संगठन की टूटती नींव और नेतृत्व की विफलता का प्रमाण — डॉ. रश्मि चंद्राकर

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महासमुंद। जिला कांग्रेस कमेटी की पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. रश्मि चंद्राकर ने डोंगरगढ़ में भाजपा के 111 कार्यकर्ताओं द्वारा दिए गए सामूहिक इस्तीफों को भाजपा की संगठनात्मक कमजोरी, नेतृत्व की विफलता और कार्यकर्ताओं में बढ़ते असंतोष का स्पष्ट संकेत बताया है। उन्होंने कहा कि जो भाजपा वर्षों से स्वयं को दुनिया का सबसे बड़ा और अनुशासित राजनीतिक संगठन बताती रही, आज उसी पार्टी के कार्यकर्ता सम्मान, भागीदारी और न्याय के अभाव में पार्टी छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। यह भाजपा के भीतर गहराते संकट का प्रमाण है।

डॉ. रश्मि चंद्राकर ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की असली ताकत उसके समर्पित कार्यकर्ता होते हैं। यदि वही कार्यकर्ता लगातार उपेक्षा, गुटबाजी और मनमानी से परेशान होकर इस्तीफा देने लगें, तो यह केवल एक संगठनात्मक घटना नहीं, बल्कि नेतृत्व के प्रति टूटते विश्वास का गंभीर संदेश होता है। डोंगरगढ़ में एक साथ 111 कार्यकर्ताओं का इस्तीफा बताता है कि भाजपा के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है।

उन्होंने कहा कि भाजपा ने वर्षों तक अपने कार्यकर्ताओं को केवल चुनावी मशीन की तरह इस्तेमाल किया, लेकिन जब सम्मान और भागीदारी देने की बारी आई तो उन्हें किनारे कर दिया गया। यही कारण है कि आज पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। सत्ता का अहंकार इतना बढ़ चुका है कि भाजपा नेतृत्व अपने ही कार्यकर्ताओं की आवाज़ सुनने को तैयार नहीं है।

डॉ. चंद्राकर ने कहा कि भाजपा जनता के सामने विकास और सुशासन के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन यदि अपने ही संगठन में विश्वास और संवाद कायम नहीं रख पा रही है, तो प्रदेश और देश की जनता का विश्वास कैसे बनाए रखेगी? जिस दल के अपने कार्यकर्ता ही नेतृत्व से निराश हो जाएँ, उस दल का नैतिक आधार स्वतः कमजोर हो जाता है।

उन्होंने कहा कि डोंगरगढ़ की घटना केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रदेश में भाजपा के भीतर बढ़ रही नाराज़गी का प्रतिबिंब है। कार्यकर्ताओं की उपेक्षा, चंद लोगों के हाथों में संगठन का केंद्रीकरण और लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी के कारण भाजपा का आधार लगातार कमजोर होता जा रहा है। आने वाले समय में इसका असर पूरे प्रदेश की राजनीति में दिखाई देगा।

डॉ. चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा कार्यकर्ताओं के सम्मान, लोकतांत्रिक संवाद और जनता की भागीदारी में विश्वास रखती है। कांग्रेस का संगठन कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के विश्वास से मजबूत होता है, जबकि भाजपा में सत्ता और पद का अहंकार संगठन पर भारी पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है। पहले भाजपा जनता का विश्वास खो रही थी, अब उसके अपने कार्यकर्ताओं का भरोसा भी डगमगाने लगा है। डोंगरगढ़ के 111 इस्तीफे केवल एक संख्या नहीं, बल्कि भाजपा की अंदरूनी सच्चाई का आईना हैं। यह घटना स्पष्ट संकेत देती है कि सत्ता के अहंकार, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और जनविरोधी राजनीति का परिणाम अब भाजपा को अपने ही संगठन के भीतर भुगतना पड़ रहा है।