क्या करवा चौथ व्रत रखने से पति की उम्र सच में लंबी होती है? प्रेमानंद महाराज का जवाब हैरान कर देगा।

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करवाचौथ व्रत की महिमा
सालभर में आने वाला करवाचौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। उनके पति की आयु में भी वृद्धि होती है। इसी के चलते सुहागिन महिलाएं इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ निर्जला व्रत रखती हैं और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।

करवाचौथ रखने से बढ़ती है पति की आयु?
प्रेमानंद जी महाराज के सत्संग में एक सज्जन ने बड़ा ही दिलचस्प सवाल किया। उन्होंने कहा कि क्या वाकई करवाचौथ का व्रत रखने से पति की उम्र लंबी होती है? अक्सर कहा जाता है कि इंसान को सांसे गिनकर मिली हैं, ऐसे में क्या कोई व्रत आयु को और भी बढ़ा सकता है।

प्रेमानंद जी महाराज का जवाब
इस प्रश्न का उत्तर देते हुए महाराज जी कहते हैं कि कोई भी व्रत या जाप आपकी आयु को बढ़ा नहीं सकता है। हम अभी की आयु जन्म से पूर्व ही तय हो जाती है। हर इंसान के हिस्से में कितनी सांसे हैं, ये पहले से ही निर्धारित हो जाता है और इसे चाहकर भी कोई नहीं बदल सकता।

सिर्फ सपोर्ट की तरह काम करते हैं व्रत
महाराज जी कहते हैं कि करवाचौथ या अन्य व्रत और जाप, एक सपोर्ट की तरह काम करते हैं। यदि आपके जीवन में कोई समस्या आने वाली है, तो ये उसका प्रभाव कम कर सकते हैं। लेकिन ये मृत्यु को टालने या फिर आपकी आयु बढ़ाने में सक्षम नहीं हैं।

मृत्यु योग को टाल सकते हैं
महाराज जी कहते हैं कि कई बार मृत्यु योग तो बन रहा होता है, इलाकों मृत्यु तय नहीं होती है। ऐसी स्थितियों में ये व्रत और जाप बहुत प्रभावी सिद्ध होते हैं। ये आपके मृत्यु योग को टाल सकते हैं। लेकिन मृत्यु का आना जब तय है, तो तय है उसे टाला नहीं जा सकता।

मृत्यु लोक में सबका समय तय है
प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि मृत्युलोक में आने वाले हर प्राणी का समय तय है। किसी के लिए यदि दस दिन का जीवन ही लिखा है, तो वो दस दिन में ही चला जाएगा। ऐसे में शोक या दुख करने का कोई अर्थ ही नहीं है। ये व्रत, जाप आदि केवल बाहरी सपोर्ट की तरह ही काम करते हैं।

कब रखा जाएगा करवाचौथ का व्रत?
इस साल करवाचौथ का व्रत 10 अक्टूबर को रखा जाएगा। इस दिन चौथ माता की पूजा की जाती है और सुहागिन महिलाएं सोलह शृंगार कर तैयार होती हैं। करवाचौथ के दिन निर्जला व्रत रखा जाता है, फिर शाम को चंद्रमा देखकर जल देने के बाद व्रत खोल जाता है।